हाथी और दर्जी की कहानी

hathi aur darji ki kahani
हाथी और दर्जी की कहानी

 

हाथी और दर्जी की कहानी

 

मेरे प्यारे नन्हे दोस्तों आज में आपके लिए एक बहुत ही प्रसिद्ध हाथी और दर्जी की कहानी लेकर आया हु। आपने यह कहानी अपने माता पिता या नाना नानी से जरुर सुनी होगी। दोस्तों इस कहानी से हमे सीख मिलती है की अगर आप दूसरों का बुरा करेंगे तो आपके साथ भी बुरा होगा ।

 

बहुत समय पहले की बात है। एक गाँव में एक मंदिर था। उस मंदिर के पुजारी के पास एक हाथी था। हाथी मंदिर में आने वाले भक्तों का स्वागत करता था। गाँव के सभी लोग हाथी से प्यार करते थे ।

 

मंदिर में पूजा अर्चना समाप्त हो जाने के पश्चात हाथी नहाने के लिए गाँव के तालाब में जाता था और तालाब में डुबकी लगाता और नहाता था ।

 

जब हाथी तालाब में नहाकर घर लोटता था तो रास्ते में एक दर्जी की दुकान थी। हाथी हमेशा दर्जी की दुकान पर रुकता था और दर्जी हाथी को एक केला खिलाता था। इसके बाद हाथी अपनी सुन्ड से दर्जी को प्रणाम करता और घर चला जाता था ।

 

हाथी और दर्जी की कहानी

 

एक शाम जब हाथी तालाब में नहा कर घर आ रहा था और केला खाने के लिए दर्जी के दुकान पर रुका । उस दिन दर्जी शरारती मूड में था। दर्जी ने हाथी को खाने के लिए एक केला दिया हाथी ने जेसे ही केला खाया और दर्जी को प्रणाम करने के लिए सुन्ड को उठाई। दर्जी ने हाथी की सुन्ड पर सुई चुभा दी।

 

हाथी को दर्द हुआ, हाथी दर्द से करहाता हुआ अपने घर चला गया । दर्जी हाथी को दर्द से करहाता हुआ देखकर खूब हंसा और हाथी की मजाक बनाई ।

 

हमेशा की तरह दुसरे दिन भी हाथी तालाब पर नहाने के लिए गया और नहाकर लोटते वक़्त रास्ते में एक कीचड़ के गड्ढे के पास रुका और हाथी ने अपनी सुन्ड को कीचड़ से भर लिया और दर्जी की दुकान पर आ गया ।

 

हाथी और दर्जी की कहानी

 

दर्जी अपने काम में व्यस्त था। दर्जी ने कई नई पोशाकें सिल्ली और इस्त्री की थी और उन्हें बड़े करीने से व्यवस्थित किया था। वह अपने काम को निहार ही रहा था

 

जब उसने हाथी को अपनी दुकान पर रुकते देखा । अगले ही पल, हाथी ने कीचड़ से भरी अपनी सुन्ड से दर्जी की दुकान के अन्दर कीचड़ का फव्वारा छोड़ दिया और दर्जी के नए सिले हुए कपड़ों को भीगो दिया।

 

दर्जी के नए सिले हुए कपडे गंदे हो चुके थे । अब दर्जी को अपनी भूल का अहसास हो रहा था । उसने हाथी से हाथ जोड़कर माफ़ी मांगी और कहा की, हाथी मित्र आपने सही किया मुझ जेसे व्यक्ति को इसी प्रकार समझ आती है ।

 

हाथी और दर्जी की कहानी

 

दर्जी ने हाथी को कहा की, मित्र में आज के बाद किसी को कभी भी चोट नहीं पहुँचाऊँगा।

 

हाथी ने अपना सिर हिलाया, अपनी सूंड उठाई और अपने घर चला गया।

 

शिक्षा :- आप दूसरों का बुरा करेंगे तो आपके साथ भी बुरा होगा ।

 

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