शेर और बाघ की कहानी

sher aur bagh ki kahani

 

शेर और बाघ की कहानी

 

दोस्तों आज हम आपको शेर और बाघ की कहानी सुना रहे है इस कहानी से आप जानेगे की ईश्वर ने सभी को एक दुसरे की सहायता के लिए बनाया है लेकिन जब हम बड़े होते है तो जाति धर्म आदि के आधार पर एक दुसरे के साथ भेदभाव करने लगते है जबकि हम सभी को एक ही ईश्वर ने बनाया है ।

 

शेर और बाघ की कहानी

 

एक बार की बात है। दो बहुत अच्छे दोस्त थे जो एक घने जंगल में  एक साथ रहते थे। एक शेर था और दूसरा बाघ था। जब वे मिले थे बहुत छोटे थे तब वे शेर और बाघ के बीच के अंतर को नहीं जान सकते थे ।

 

इसलिए, उन्हें कभी नहीं लगा कि उनकी दोस्ती बिल्कुल अलग थी। उसी जंगल में एक साधू रहता था जो उस जंगल के पहाड़ो के पास एक शांत वातावरण में जप करता रहता था जंगल में जब भी किसी को कोई समस्या होती थी तो साधू ही उनकी समस्या का उपाय करता था ।

 

एक दिन शेर और बाघ अपनी गुफा में बेठे थे तभी बातों बातों में उनके बीच बहस होने लगी । शेर ने कहा की हम दोनों में से में ज्यादा ताकतवर हूँ इसलिए ही जंगल का राजा कहलाता हूँ इसीलिए ईश्वर ने मुझे ताकतवर बनाया है और में अकेला ही जंगल की रक्षा कर सकता हूँ मुझे जंगल की किसी भी जानवर की जरूरत नहीं है । ईश्वर ने जंगल के सभी जानवरों को मेरा पेट भरने के लिए पैदा किया है ।

 

बाघ ने कहा की नहीं ऐसा कुछ नहीं है में तुमसे ज्यादा तेज दौड़ सकता हूँ तुमसे ज्यादा फुर्तीला हूँ ईश्वर ने मुझे तुमसे ज्यादा ताकतवर बनाया है में मिनटों में शिकार कर सकता हूँ और में अकेला ही जंगल की रक्षा कर सकता हूँ मुझे जंगल की किसी भी जानवर की जरूरत नहीं है । ईश्वर ने जंगल के सभी जानवरों को मेरा पेट भरने के लिए पैदा किया है ।

 

शेर और बाघ की कहानी

 

शेर और बाघ इसी बात पर एक दुसरे से झगड़ने लगे और अपनी अपनी बात को सही साबित करने के लिए अलग अलग तर्क वितर्क रखने लगे उनकी जिद और बहस बढती गयी और वे एक दुसरे से लड़ने लगे ।

 

शेर और बाघ की बहस और झगडा सुनकर एक लोमड़ी वंहा आई । शेर और बाघ ने अपने अपने तर्क वितर्क लोमड़ी को बताये । लोमड़ी ने दोनों के तर्क वितर्क सुनकर कहा की तुम दोनों अपनी अपनी जगह सही हो, ईश्वर ने तुमको यह शक्तियां प्रदान की है इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता है ।

 

लेकिन शेर और बाघ दोनों यह जानना चाहते थे की ईश्वर ने किसको बेहतर बनाया है और कोन अकेला इस जंगल को चला सकता है । अंतत लोमड़ी ने शेर और बाघ को कहा की तुम्हारी इस बात का फैसला तो पहाड़ पर रहने वाले साधू महात्मा कर सकते है इसलिए तुम दोनों साधू महात्मा के पास चले जाओ ।

 

लोमड़ी की बात सुनकर शेर और बाघ दोनों साधू महात्मा के पास जाते है और अपनी अपनी बात बताते है ।

 

साधू दोनों की बात सुनकर कहता है की तुम दोनों बचपन से एक दुसरे का सहारा हो और जब तुम दोनों छोटे थे तो तुम्हे इस बात की जानकारी नहीं थी की तुम अलग अलग जाति के हो इसलिए तुमने कभी झगडा नहीं किया ।

 

और अब जब तुम समझदार और बड़े हो गये तो एक दुसरे का साथ देने की जगह अपने आप को ज्यादा महत्वपूर्ण और शक्तिशाली साबित करने में लगे हो ।

 

शेर और बाघ की कहानी

 

शेर और बाघ को समझाते हुवे साधू ने कहा की संसार के प्रत्येक प्राणी को एक ही ईश्वर ने पैदा किया है और ईश्वर ने सबको अलग अलग खूबियाँ दी है ताकि हम सभी एक दुसरे के लिए काम आ सके ।

 

साधू ने शेर से कहा की तुम्हे भी याद होगा की जब तुम छोटे थे और तुम्हारा स्वास्थ्य ठीक नहीं था और तुम दौड़ भी नहीं पा रहे थे तब इसी बाघ ने तुम्हारे भोजन के प्रबंध के लिए कई शिकार किये और तुम्हारा पेट भरा ।

 

साधू ने बाघ से कहा की तुम्हे भी याद होगा की जब तुम छोटे थे और तुम्हे भेडियों ने घेर लिया था तब इसी शेर ने तुम्हारी रक्षा की थी ।

 

साधू ने शेर और बाघ को समझाते हुवे कहा की, ईश्वर ने संसार में प्रत्येक प्राणी को एक दुसरे के लिए बनाया है अगर जंगल में दुसरे जानवर नहीं होंगे तो आप किस का शिकार करोगे और क्या खाओगे । हर जानवर और प्राणी का अपना महत्व है और प्रत्येक प्राणी इस संसार के लिए अति आवश्यक है । ईश्वर ने हमारी खूबियाँ केवल हमारे लिए ही नहीं बल्कि सभी के लिए हमे दी है इसलिए हमारा फर्ज बनता है की हम हमारी शक्तियों और खूबियों पर घमंड करने की जगह इनका उपयोग एक दुसरे की भलाई के लिए करे और तभी हमारा ईश्वर हमसे खुश होगा ।

 

शेर और बाघ अब सब कुछ समझ चुके थे और शेर और बाघ ने एक दुसरे से वादा किया की वो हमेशा एक दुसरे के साथ रहेंगे और एक दुसरे के मदद करेंगे ।

 

शिक्षा :- हमे ईश्वर की दी हुवी खूबियों पर घमंड नहीं करना चाहिए बल्कि उन खूबियों से दूसरों का भला करना चाहिए तब ही हमारा ईश्वर हमसे खुश होता है ।

 

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