शेर और कछुआ की कहानी

sher aur kachhua ki kahani
शेर और कछुआ की कहानी

 

शेर और कछुआ की कहानी

 

एक जंगल में एक शेर रहता था । शेर उस जंगल का राजा था । एक दिन शेर को कोई शिकार नहीं मिला शेर ने काफी खोजबीन की लेकिन तेज गर्मी होने के कारण सभी जानवर इधर उधर अपने अपने घरों में छिपे थे ।

 

शेर शिकार की तलाश में कई देर भटकता रहा लेकिन उसे कोई शिकार नहीं मिला आखिर में शेर थक हार कर एक बड़े पेड़ के नीचे लेट गया और आराम करने लगा ।

 

इतने में एक के कछुआ वंहा से गुजरा क्योंकि चारों तरफ सन्नाटा था इसलिए कछुआ के चलने से जमीन पर पड़े पत्तों से सरसराहट की आवाज आ रही थी । जिसे सुनकर शेर की नींद खुल गयी । शेर ने देखा की एक कछुआ वंहा से गुजर रहा है । शेर ने कछुआ को रोक लिया और बोला की कंहा जा रहा है ।

 

तब कछुआ ने जवाब दिया शेर महाराज में मेरे भोजन की तलाश में जा रहा हूँ तब शेर ने कछुआ से कहा मुर्ख क्या तुझे नहीं मालूम की में इस जंगल का राजा हूँ और आज मेने कोई शिकार नहीं किया है और में भूखा हूँ और तुम मेरी प्रजा हो । तुम्हे अपना पेट भरने से पहले मेरा पेट भरना होगा ।

 

इस पर कछुआ ने कहा शेर महाराज आपका पेट तो आप ही भर सकते है । में आपका पेट कैसे भर सकता हूँ । इस पर शेर ने कछुआ के शिकार के लिए अपना पंजा कछुआ पर मारा लेकिन कछुआ ने अपनी गर्दन अपने पत्थर जैसे खोल में डाल ली ।

 

शेर ने काफी जोर लगाया लेकिन वह कछुआ का कुछ भी बिगाड़ नहीं पाया और बोला की कछुआ क्या तुझे नहीं मालूम की में सर्वशक्तिमान हूँ । में बहुत तेज दौड़ सकता हूँ । नदियों में तेजी से तेर सकता हूँ और जंगल के बड़े से बड़े जानवर का शिकार कर सकता हूँ और तु मुझ से बचने की कोशिश कर रहा है । अगर में चाहूँ तो तुझे अभी इस बड़े पहाड़ के पत्थर के नीचे दबा कर मार सकता हूँ ।

 

शेर और कछुआ की कहानी

 

तब कछुआ ने अपनी गर्दन अपने खोल से निकाली और बोला महाराज में जानता हूँ आप मुझे खाना चाहते है लेकिन यदि आप वास्तव में सर्व शक्तिमान है तो मुझ से नदी में तेरने का मुकाबला कीजिये अगर आप विजयी हुवे तो आप मुझे अपना भोजन बना लिजियेगा में कोई विरोध नहीं करूँगा ।

 

इस पर शेर ने कहा । मुर्ख तु मुझ से मुकाबला करना चाहता है । चल कोई बात नहीं आज तुझ से मुकाबला करने के बाद ही तुझे मार कर खाऊंगा ।

 

कछुआ ने मन ही मन सोचा की जान बचाने के लिए मुकाबले की बात बोल तो दी लेकिन शेर तो नदी में भी उससे तेज तेर सकता है ।

 

कछुआ और शेर तेरने का मुकाबला करने के लिये दोनों नदी के किनारे गये । तब कछुआ ने कहा महाराज में एक अंतिम बार मेरे मित्र से मिल लेता हूँ । शायद आज के बाद कभी मिल ना पाऊ ।

 

इस पर शेर ने कहा । हाँ हाँ जाओ और अंतिम बार अपने मित्र से मिल लो ।

 

कछुआ अपने मित्र के पास गया और उसे सारी बात बताई । कछुआ का मित्र बहुत बुद्धिमान था । उसने अपने मित्र को बचाने के लिए एक योजना बनाई और अपने मित्र कछुआ से बोला की तुम जब नदी में तेरने का मुकाबला शुरू करो तो नदी के इसी किनारे पर कूद कर रुक जाना और पानी में अन्दर चले जाना ताकि शेर तुम्हे देख ना सके और में नदी के दुसरे किनारे पर चला जाता हु । और जेसे ही शेर उस किनारे पहुँचने वाला होगा में शेर से पहले ही पानी से बाहर आकर विजेता बन जाऊंगा । और शेर को शक ना हो इसलिए तुम और में अपने अपने मुंह में एक जैसा एक कमल का फुल रख लेते है ।

 

इस पर कछुआ तेयार हो गया और एक कमल का फुल अपने मुंह में पकड़ कर शेर के पास आ गया और दुसरा कछुआ अपने मुंह में एक कमल का फुल डालकर शेर से छुपकर नदी के दुसरे किनारे पर चला गया ।

 

शेर ने कछुआ के मुंह में कमल का फुल देखा और बोला ये कमल का फुल मुंह में क्यों लेकर आये हो । इस पर कछुआ बोला महाराज मेरे मित्र ने मुझे शुभकामना स्वरुप ये कमल का फुल दिया है । और बोला है की अगर ये कमल का फुल तु तेरे मुंह में रखेगा तो अवश्य ही विजेता होगा ।

 

शेर और कछुआ की कहानी

 

इस पर शेर जोर जोर से हंसा और बोला चल मुर्ख मुकाबले के लिए तेयार हो जा और शेर और कछुआ वन टू थ्री बोलकर नदी में कूद गये।

 

शेर नदी में तेजी से तेर रहा था । लेकिन कछुआ योजना अनुसार उसी किनारे पर नदी के पानी में छुप गया ।

 

शेर तेजी से तेरता हुवा नदी के किनारे पहुँचने वाला ही था । इतने में दूसरा कछुआ पानी से बाहर आ गया और शेर से पहले दुसरे किनारे पर पहुँच कर पहला राउंड पूरा होने का ऐलान कर दिया और वापस नदी में चला गया ।

शेर को आश्चर्य हुवा की पहला राउंड कछुआ जीत गया । लेकिन उसने भी जल्दी से अपना पहला राउंड पूरा कर लिया और वापस इस किनारे आने के लिए तेरने लगा ।

 

शेर इस किनारे पहुँचने वाला ही था इतने में इस किनारे पर छुपा हुवा कछुआ पानी से बाहर आया और दूसरा राउंड पूरा होने का ऐलान कर दिया और वापस नदी में चला गया ।

 

शेर को आश्चर्य हुवा की कछुआ दूसरा राउंड फिर जीत गया । लेकिन उसने भी जल्दी से अपना दूसरा राउंड पूरा कर लिया और वापस उस किनारे जाने के लिए तेरने लगा ।

 

शेर कछुआ को हराने के लिए इस किनारे से उस किनारे और उस किनारे से इस किनारे तेरता रहा और हर बार कछुआ की योजना के कारण हारता रहा ।

 

शेर और कछुआ की कहानी

 

शेर जिद्दी और घमंडी था और वो कछुए से नहीं हारना चाहता था । इसलिए शेर ने कछुआ को हराने की लिए अपनी जान की बाजी लगा दी और कछुआ को हराने के लिए इस किनारे से उस किनारे और उस किनारे से इस किनारे तेरता रहा ।

 

और अंततः शेर की शक्ति समाप्त हो गयी और शेर नदी के बीच में डूब गया और मर गया ।

 

शिक्षा :- कभी भी अपनी शक्तियों पर घमंड नहीं करना चाहिए और किसी भी प्राणी को कम नहीं आंकना चाहिए और हमेशा बुद्धिमान बनना चाहिए और बुद्धिमान दोस्त बनाने चाहिए

 

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