लोमड़ी और खरगोश की कहानी

lomdi aur khargosh ki kahani
लोमड़ी और खरगोश की कहानी

 

लोमड़ी और खरगोश की कहानी

 

मुझे पूरा यकीन है कि आपको इस कहानी से एक बहुत ही महत्वपूर्ण सबक मिलने वाला है जिसे आप निश्चित रूप से अपने जीवन पर लागू कर सकते हैं। अब मैं आपको लोमड़ी और खरगोश की एक कहानी सुनाने जा रहा हू ध्यान से सुनिए या पढ़िए ।

 

बहुत समय पहले की बात है एक घना जंगल था वसंत के महीने का दिन था। उस जंगल में एक खरगोश था जो जंगल के मैदान में घास चर रहा था।

 

उसी जंगल में एक लोमड़ियों का झुण्ड एक दूसरे से बात करते हुए मौज-मस्ती कर रहा था। लोमड़ी के झुण्ड ने एक खरगोश को घास चरते हुए देखा ।

 

लोमड़ी और खरगोश की एक कहानी

 

लोमड़ियों में से एक लोमड़ी ने कहा की मैं इस खरगोश को पकड़ कर आज का भोजन बनाउंगी और बहुत ही मजे से खाऊँगी । और यह सब सोचकर लोमड़ी मन ही मन बहुत खुश हो रही थी और लोमड़ी ने खरगोश के पीछे दौड़ना शुरू किया ।

 

लेकिन ख़रगोश ने लोमड़ी को अपनी और आते देख लिया था इसलिए खरगोश ने भी अपनी जान बचाने के लिए तेजी से दौड़ना शुरू किया कई देर तक लोमड़ी खरगोश का पीछा करती रही लेकिन खरगोश भी तेजी से दौड़ता रहा आखिरकार दोनों की सांस फूलने लगी और दोनों ही एक साथ रुक गये ।

 

लोमड़ी और खरगोश की एक कहानी

 

लोमड़ी ने खरगोश को कहा की में तुझ से बहुत ताकतवर और फुर्तीली हूँ तु मेरे सामने बहुत ही कमजोर जानवर है और मुझ से ज्यादा देर बच नहीं पायेगा इसलिए तुझे मेरी सलाह है की अपने आप को मेरे हवाले कर दे । लेकिन खरगोश ने लोमड़ी की बात नहीं सुनी और खरगोश ने लोमड़ी से कहा की माना तुम मुझ से ज्यादा फुर्तीली और ताकतवर हो लेकिन मैंने हार मानना नहीं सीखा है जब तुम मुझे पकड लो तो मेरा शिकार कर लेना और मुझे खा लेना ।

 

लोमड़ी को खरगोश की बात सुनकर बहुत गुस्सा आया क्योंकि लोमड़ी बहुत ज्यादा थक चुकी थी और लोमड़ी के शरीर में और ज्यादा दौड़ने की ताकत नहीं थी ।

 

लोमड़ी ने थोडा सांस लिया और फिर खरगोश के पीछे दौड़ना शुरू किया लेकिन खरगोश ने भी वापस दौड़ना शुरू कर दिया दोनों कई देर तक भागते रहे और फिर दोनों की सांसे फूलने लगी और दोनों रुक गये ।

 

अब लोमड़ी बहुत ज्यादा थक चुकी थी उसके शरीर में एक इंच भी दौड़ने की शक्ति नहीं बची थी और वह अपने से छोटे खरगोश को पकड नहीं पाई थी इसलिए लोमड़ी को बहुत ज्यादा गुस्सा आ चूका था ।

 

लोमड़ी और खरगोश की एक कहानी

 

इस प्रकार तीन चार बार दोनों के मध्य रेस हुवी खरगोश ने हर बार हार ना मानकर लोमड़ी से दौड़ लगाई और हर बार लोमड़ी खरगोश को पकड नहीं पाई ।

 

अब शाम हो चुकी थी अँधेरा होने वाला था लोमड़ी अब जान चुकी थी की वह खरगोश को पकड़ नहीं पायेगी क्योंकि अब अँधेरा हो जायेगा और खरगोश कही भी छिप जाएगा इसलिए अंततः लोमड़ी ने हार मान ली और खरगोश भी भाग गया ।

 

दोस्तों इस लोमड़ी और खरगोश की कहानी से हमे बहुत कुछ सिखने को मिलता है । अगर हम हमेशा अपना सर्वश्रेष्ठ देते हैं और प्रयास करते हैं तो निश्चित ही हमे सफलता मिलती हैं।

 

 

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बहुत समय पहले की बात है एक जंगल में एक खरगोश एक लोमड़ी को घुर रहा था लोमड़ी ने खरगोश से कहा की मुझे क्यों घुर रहे हो क्या तुम्हे अपने जीवन से प्यार नहीं है ।

 

 

lomdi aur khargosh ki kahani
लोमड़ी और खरगोश की कहानी

 

इस पर खरगोश ने लोमड़ी से कहा की में देख रहा हु की क्या वास्तव में लोमड़ी चालाक होती है और चालाकी का मतलब क्या होता है । तो लोमड़ी ने खरगोश से कहा की तुम वाकई हिम्मत वाले हो इसलिए में तुम्हे नहीं मारूंगी ।

 

लोमड़ी ने खरगोश से कहा की आज से हम दोनों दोस्त है आज शाम को क्यों ना हम साथ मिलकर मेरे घर पर भोजन करे और उसी वक़्त इस विषय पर भी चर्चा करेंगे । इस पर खरगोश तेयार हो गया ।

 

शाम को खरगोश लोमड़ी के घर गया तो उसने देखा की खाने की टेबल पर कटोरी और प्लेट खाली पड़े है और भोजन कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा है ।

 

यह देख कर खरगोश के दिमाग में आया की लोमड़ी ने अपनी चालाकी दिखाने की लिए ही उसे अपने घर खाने के लिए बुलाया है और लोमड़ी मुझे ही आज के भोजन के रूप में खाना चाहती है ।

 

लोमड़ी बाहर आती उससे पहले ही खरगोश ने मोका देखकर भागने की सोची और जल्दी से लोमड़ी के घर से भाग गया । खरगोश अब चालाकी का मतलब समझ चूका था ।

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