लालची काले बंदर की कहानी

lalchi kale bandar ki kahani
लालची काले बंदर की कहानी

 

लालची काले बंदर की कहानी

 

बहुत समय पहले की बात है। एक जंगल में एक काला बंदर रहता था। काला बंदर बहुत ही लालची था। एक दिन जब काला बंदर जंगल में मधुमखियों के छत्ते से शहद खाने के लिए एक पेड़ पर चढ़ रहा था ।

 

अचानक काले बंदर की पूंछ में एक कांटा चुभ गया। बंदर ने अपनी पूरी ताकत से कांटे को अपनी पूंछ से निकालने की कोशिश की, लेकिन वो कांटे को निकल नहीं सका, अंत में उसने यह निश्चय किया की शहर जाकर वो इस कांटे को निकलवाकर आएगा ।

 

लालची काले बंदर की कहानी

 

काला बंदर शहर में एक नाई की दुकान पर गया और नाई से कहा की तुम मेरी पूंछ से ये कांटा निकाल दो, तुम्हे जितने पैसे चाहिए में दे दूंगा। यह सुनकर नाई बंदर की पूंछ से कांटा निकालने को तेयार हो गया ।

 

नाई ने कांटे को निकालने के लिए बहुत कोशिश की मगर कांटा नहीं निकल रहा था नाई ने अपने चाकू से भी प्रत्यन किया लेकिन अचानक नाई के हाथ से बंदर की पूंछ का आखिरी हिस्सा कट गया ।

 

लालची काला बंदर बहुत रोया और चिल्लाया और नाई से बोला की, तुमने मेरी पूंछ काट दी, अब तुम मुझे मेरी पूंछ दो या तुम्हारा चाकू मुझे दे दो ।

 

नाई ने कहा की तुम्हे पूंछ तो नहीं दे सकता हूँ इसलिए तुम मेरा चाकू रख लो, बंदर नाई का चाकू लेकर चला गया ।

 

बंदर ने रास्ते में एक बूढी औरत को लकड़ी काटते हुए देखा और उसके पास जाकर बोला की, अम्मा ये लो तुम मेरा चाकू ले लो इससे तुम लकड़ियाँ आसानी से काट सकती हो ।

 

बूढी औरत बहुत खुश हुई और बंदर का चाकू ले लिया और चाकू से लकड़ियाँ काटने लगी, जब बूढी औरत चाकू से लकडिया काट रही थी तो अचानक चाकू टूट गया। इस पर बंदर जोर जोर से रोने और चिल्लाने लगा ।

 

लालची काले बंदर की कहानी

 

बंदर ने बूढी औरत से कहा की, मुझे मेरा सही चाकू वापस करो या फिर तुम्हारी काटी हुई सारी लकड़ियाँ मुझे दे दो, बुढियां ने चाकू को ठीक करने की कोशिश की मगर टुटा हुआ चाकू सही नहीं हो पाया। इस पर आख़िरकार बुढिया ने अपनी मेहनत से काटी हुई सारी लकड़ियाँ काले बंदर को दे दी। काला बंदर लकड़ियाँ लेकर चला गया ।

 

लालची बंदर ने सोचा की सारी लकड़ियों को शहर में जाकर बेच देता हूँ और खूब सारे रुपये कमा लेता हु। यह सोच कर बंदर वापस शहर की और रवाना हो गया रास्ते में उसे एक औरत दिखाई दी, जो केक बना रही थी  

 

काले बंदर के मुंह में केक को देख कर पानी आ गया। बंदर उस औरत के पास जाकर बोला की, तुम्हारी लकड़ियाँ ख़त्म हो गयी है मेरी ये लकड़ियाँ जलाने के लिए ले लो और खूब सारे केक बना लो ।

 

औरत ने सोचा की बंदर उसका भला करना चाहता है यह सोच कर औरत ने बंदर से लकड़ियाँ ले ली और लकड़ियों से केक बनाने लग गयी। जेसे ही औरत ने आखिरी लकड़ी चूल्हे में डाली बंदर चिल्लाया और रोने लगा और औरत से कहने लगा की, तुमने मेरी सारी लकड़ियाँ जला दी मुझे मेरी लकड़ियाँ वापस करो या फिर तुम्हारे सारे केक मुझे दे दो ।

 

लालची काले बंदर की कहानी

 

लकड़ियाँ सारी जल चुकी थी। औरत के पास कोई रास्ता नहीं था तो उसने अपने सारे केक बंदर को दे दिए, बंदर केक लेकर चला गया ।

 

लालची काला बंदर बहुत ही खुश था क्योंकी उसके पास खूब सारे केक है और वह इनमे से कुछ को शहर में बेच कर पैसे कमा लेगा और कुछ को खा लेगा। यह सोचकर बंदर शहर में बाजार की और जाने लगा ।

 

रास्ते में एक कुत्ता बेठा था। उसने बंदर के पास खूब सारे केक देखे। कुत्ता बंदर के पास दौड़ कर आया और बंदर को मार कर उसके सारे केक खा लिए ।

 

शिक्षा :- लालच बुरी बला है ।

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ